चम्पावत : कोरोना काल में जहां एक ओर पूरा स्वास्थ्य महकमा अपनी जिम्मेदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ जान हथेली पर रखकर कोरोना महामारी के रोकथाम में जी-जान से जुटा हुआ है। ऐसे संकटकाल में राजनीति भी कम हावी नहीं है। सूत्रों के मुताबिक कई लोग नेताओं से जुगाड़ लगाकर प्रदेश से बाहर से आए लोगों को होम आइसोलेशन का दबाव बना रहे हैं। ऐसा दबाव न केवल उसके परिवार बल्कि मोहल्ले और पड़ोसियों के लिए भारी पड़ सकता है।
जहां टनकपुर-बनबसा अब कोरोना का केंद्र बन चुका है और वहां लगातार कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में अब चम्पावत मुख्यालय भी पीछे नहीं है। पिछले तीन दिनों में ही चम्पावत में लगभग दो दर्जन से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना अपनी पकड़ बना रहा है। जिससे अब लोगों को और ज्यादा सुरक्षा व एहतियात बरतने की जरूरत है। जरा सी चूक और लापरवाही खुद के साथ ही अपने परिवार, आसपास रहने वाले और समाज के लिए भारी पड़ सकती है।

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ऐसे संकट के समय में राजनीति भी कम नहीं हो रही है। नाम न लिखने की शर्त पर डाक्टरों ने बताया कि चम्पावत में भी प्रदेश से बाहर से आने वाले लोगों को संस्थागत क्वारंटाइन के बजाए होम क्वारंटाइन के लिए राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। डाक्टरों ने बताया कि कुछ दिनों पूर्व दिल्ली से आई एक युवती ने स्क्रीनिंग और सैंपलिंग के दौरान चिकित्सा टीम के साथ अभद्रता की। वह प्रदेश की सीमा से बाहर दूसरे प्रदेश से आई थी और नियम के अनुसार उसे संस्थागत क्वारंटाइन किया गया। इस दौरान उसने अभद्रता करते हुए प्रशासन व चिकित्सा विभाग पर आरोप लगाया कि उन्हें पैसे मिलते हैं इसलिए वह 14 दिन का क्वारंटाइन कर रहे हैं। राजस्व व चिकित्सा टीम द्वारा रोष जताते के बाद मौके पर ही युवती द्वारा लिखित रूप में माफी भी मांगी गई थी।

सरकार की ओर से इतनी जागरूकता के बाद भी युवती को कोरोना गाइडलाइन की जानकारी नहीं हो सकती, ऐसा तो संभव नहीं। इस दौरान युवती ने होम क्वारंटाइन के लिए भी दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन उसकी एक न चली और उसे नगर के एक होटल में क्वारंटाइन किया गया।
इस दौरान शनिवार को चिकित्सक ने नगर के होटल में क्वारंटाइन की गई युवती की स्क्रीनिंग गोरलचौड़ मैदान में की तो उसका बुखार सामान्य से थोड़ा ज्यादा मिला तो चिकित्सक ने उसका आरटीपीसीआर सैंपल लेने का सुझाव दिया। हालांकि, उसका सैंपल पहले भेजा जा चुका था, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। लेकिन, शनिवार को बुखार होने पर चिकित्सक ने दुबारा एक बार आरटीपीसीआर सैंपल के लिए संस्तुत किया। इस पर कोरोना ड्यूटी में लगे राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने युवती से कहा कि वह होटल में ही रहें और उनका सैंपल लिया जाएगा और रिपोर्ट आने के बाद आगे जो भी कार्रवाई होगी वह की जाएगी।

इसके साथ ही 14 दिन संस्थागत क्वारंटाइन पूरा होने को तीन-चार दिन बचे ही थे कि यहां भी नेतागिरी हावी हो गई। विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि एक नेता होटल में पहुंचा और होटल प्रबंधक से युवती को छोडऩे पर दबाव बनाया और अभद्रता भी की। प्रबंधक के साफ तौर से मना करने पर उसने कहा कि ऐसे तो मैंने दूसरे होटलों से 36 छुड़ा दिए हैं। स्क्रीनिंग के बाद जो पर्ची युवती को उपलब्ध कराई गई थी, जिसमें सामान्य से ज्यादा बुखार के संकेत लिखे थे, राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने कहा कि इस आधार पर तो युवती को होटल में ही रखा जाएगा। इस पर वह पर्ची फाड़ दी गई और राजस्व कर्मियों पर राजनीतिक दबाव बनाकर उसे घर भेज दिया गया।
ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोरोना जैसे संकटकाल में जहां एक ओर स्वास्थ्य और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैदी के साथ कोरोना की रोकथाम में जुटा है, वहीं कुछ नेता अपनी नेतागिरी की आड़ में नियमों की खुलकर धज्जियां उड़ा रहे हैं।

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग कोरोना की रोकथाम के लिए लगातार जुटा हुआ है। इसके बावजूद जनप्रतिनिधियों द्वारा इस तरह का दबाव हमारे चिकित्सकों के ऊपर बनाया जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मेरा जनप्रतिनिधियों से निवेदन है कि परस्पर सहयोग किया जाए।
– डॉ. आरपी खंडूरी, सीएमओ चम्पावत।
इस मामले की अभी मुझे जानकारी नहीं है। यदि ऐसा हुआ है तो यह गलत है। ऐसे संवेदनशील मामलों में राजनीतिक दबाव बनाना ठीक नहीं है। ऐसे में कोरोना फैलने की संभावना ज्यादा हो सकती है। हमारी जिले की टीम कोरोना के नियंत्रण में पूरी तरह मुस्तैद है। मामले की जानकारी जुटाकर जांच कराई जाएगी।
– एसएन पांडेय, जिलाधिकारी, चम्पावत।

1 COMMENT

  1. नेता ने सही किया टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आने पर भी क्वारंटाइन से नहीं छोड़ा जाना बहूत ही निंदनीय है

    पहाड़ो की समस्या को देखते हुए
    14 दिन तक किसी को क्वारंटाइन में रहना बहूत मुश्किल है
    10 दिन की छुट्टी में 14 दिन क्वारंटाइन कैसे होगा

    सरकार को विचार करना चाहिए और रैपिड टेस्टिंग की वियावस्था करनी चाहिए

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