चम्‍पावत में आने वाले प्रवासियों की स्‍क्रीनिंग/सैंपलिंग करते डॉ मनीष बिष्‍ट।

गौरव पांडेय, कुमाऊं पोस्ट चम्पावत :

…. धरती के भगवान कहे जाने वाले चिकित्सक इस कोरोना काल में अपनी पूरी कर्तव्यनिष्ठा के साथ जुटे हुए हैं। एक ओर जहां गांवों व दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर वह देर रात तक कोरोना सैंपलिंग कर रहे हैं, तो कई चिकित्सकों व चिकित्सा कार्य से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों ने खुद को अपनी परिवार की सुरक्षा के खातिर खुद को अलग किया हुआ है। अपनी जान की बाजी लगाकर धरती के भगवान कोरोना की रोकथाम में पूरी मुस्तैदी के साथ डटे हैं।

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चम्पावत जिले में भी ऐसे तमाम उदाहरण हैं, जो कोरोना काल में पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्य को निभा रहे हैं। ऐसे ही एक चिकित्सक हैं डॉ.मनीष बिष्ट। मूल रूप से जनपद पिथौरागढ़ के वड्डा गांव के रहने वाले डॉ. बिष्ट का परिवार हाल में चम्पावत मुख्यालय के गोरलचौड़ रोड़ में रहता है। उनके माता-पिता दोनों शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। पिताजी उमेद बिष्ट राजकीय इंटर कॉलेज रमैला में प्रधानाचार्य हैं। जबकि माताजी लीला बिष्ट जूनियर हाईस्कूल सैजना, खटीमा में सहायक अध्यापक पद पर तैनात हैं। स्कूली शिक्षा चम्पावत के एबीसी अल्मामेटर से होने के बाद उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी नीट की प्रवेश परीक्षा दी और बेहतर रैंक आने पर उन्हें सुशीला तिवारी सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला और 2017 में उन्होंने वहां से एमबीबीएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। सरकार से हुए अनुबंध के तहत उन्हें पांच वर्ष तक सरकारी चिकित्सालयों में सेवाएं देनी होंगी। जिसके तहत उनकी तैनाती चम्पावत में हुई। 2018 में एलोपैथिक चिकित्सालय सिप्टी में पहली तैनाती हुई और वहां उन्होंने डेढ़ साल सेवाएं दी। जिसके बाद उन्हें जिला अस्पताल में संबद्ध कर दिया गया। कोरोना महामारी के बाद जिले में आने वाले प्रवासियों की सैंपलिंग के कार्य में वह जुटे रहे। बाद में प्रवासियों व स्थानीय लोगों की कोरोना सैंपलिंग का कार्य भी बखूबी कर रहे हैं। कटेंटमेंट जोन घोषित हुए सल्ली, चैकुनीबोरा सहित तहसील क्षेत्र की डेढ़ दर्जन से ज्यादा गांवों में उन्होंने अपनी टीम के साथ जाकर सैंपलिंग की।

अब तक कर चुके हैं 4803 कोरोना सैंपलिंग
डॉ. बिष्ट पिछले छह महिने में अब तक लगभग 4803 से ज्यादा कोरोना सैंपलिंग कर चुके हैं। जिनमें उन्होंने 3238 आरटीपीसीआर सैंपल, 940 एंटीबॉडी टेस्ट और 625 एंटीजन टेस्टिंग की है। उन्होंने बताया कि टेस्टिंग में राजस्व विभाग का चिकित्सा टीम व उन्हें लगातार सकारात्मक सहयोग मिलता रहा है।

सैंपलिंग करते करते हो जाती थी रात
डॉ. बिष्ट ने बताया कि कई बार तो ऐसी स्थितियां आई हैं जहां सैंपलिंग करते-करते रात के 9-10 बज जाते थे। सल्ली, अमोड़ी, चैकुनीबोरा गांव में सैंपलिंग लेने में काफी रात हो गई थी। ऐसी स्थिति में भी उन्होंने धैर्य रखते हुए अपनी जिम्मेदारी को तरजीह देकर सैंपलिंग पर पूरा फोकस किया हुआ है।

सीमित संसाधनों में भरपूर करने का प्रयास
डॉ. बिष्ट ने कुमाऊं पोस्ट से बातचीत में कहा कि कोरोनाकाल की इस परिस्थिति में सभी मजबूरी से आ रहे हैं। लिहाजा हमारा कर्तव्य है कि जितना ज्यादा हो सके, उतना सहयोग किया जाए। कहा कि सीमित संसाधनों में भी भरपूर करने का प्रयास है और वह इसमें सफल भी हुए हैं। फिलहाल ऐसी परिस्थिति में उनका पूरा फोकस है कि वह लोगों के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखें और स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा के लिए उन्हें बेहतर रूप में अवगत कराएं।

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