33000 पेड़ों की बलि से बनेगी आॅल वेदर रोड

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उत्तराखंड में प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट आॅल वेदर रोड का कार्य शुरू होने लग गया है। रोड के पहले चरण में सड़क चैड़ीकरण में बाधा बन रहे 33 हजार से अधिक पेड़ों के कटान का कार्य शुरू किया गया। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग में अभी भी पेड़ों के कटान का कार्य चल रहा है। पिछले दिनों चम्पावत में हुई प्रशासनिक
अधिकारियों की बैठक के बाद अब काम में तेजी आ रही है। टनकपुर-ककराली गेट से सड़क चैड़ीकरण का कार्य शुरू कर दिया गया है। सड़क का कार्य हर हाल में वर्ष 2019 तक पूरा करना है। उत्तराखंड में आॅल वेदर रोड का कार्य पूरा होने से भविष्य में चारधाम यात्रा जहां श्रद्धालुओं व पर्यटकों के लिए सुगम होगी वहीं टनकपुर-पिथौरागढ़ मार्ग भी बेहद आरामदायक हो जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने फरवरी में हुए विधानसभा चुनाव में प्रदेश को आॅल वेदर रोड का तोहफा दिया था। उन्होंने इसके लिए 12 हजार करोड़ रूपये मंजूर किए। प्रधानमंत्री ने दिसंबर 2016 में देहरादून में चारधाम महामार्ग विकास परियोजना का शिलान्यास किया था। आल वेदर रोड की निगरानी मुख्यमंत्री कार्यालय से की जा रही है और हर सप्ताह इसकी प्रगति की माॅनीटरिंग हो रही है। गढ़वाल में यह केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री व गंगोत्री को आपस में जोडे़गी। सड़क 12 मीटर चैड़ी बनेगी जबकि साढ़े दस फीट में डामरीकरण किया जाएगा। प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग 58, 108, 109 और 125 की 900 किमी सड़क इसके दायरे में होगी। सड़क चैड़ीकरण के दौरान भागीरथी इको संेसिटिव जोन के प्रभावित होने के चलते नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आपत्ति भी जताई थी। इस पर बीआरओ की ओर से एफिडेविट देते हुए कहा गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्व को देखते हुए यह सड़क बेहद महत्वपूर्ण है। साथ ही पेड़ों का चिन्हीकरण वन विभाग की सलाह पर किया गया है। आॅल वेदर रोड में सात नई सड़कें बनाई जाएंगी। 15 बड़े व 101 छोटे पुल, 5596 कल्वर्ट और 12 बाइपास बनेंगे।
अब बात करते हैं टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग की। 150 किमी लंबा यह मार्ग काफी दुर्गम है। 1962 के बाद जब इस सड़क का निर्माण किया गया तो इसकी चैड़ाई बेहद कम थी। कई जगहों पर तो दूसरी ओर से वाहन आने की स्थिति में बसों व अन्य वाहनों को काफी दूर पहले ही रोक लिया जाता था। 150 किमी का सफर करीब सात घंटे से अधिक समय में पूरा होता था। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस सड़क के चौड़ीकरण का कार्य 1980 के बाद शुरू हुआ। इसका जिम्मा बीआरओ को दिया गया। बीआरओ पर आरोप लगते रहे कि सड़क चैड़ीकरण के लिए उसने अंधाधुंध बारूद का प्रयोग किया। इसका खामियाजा बाद में यात्रियों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी भुगतना पड़ा। बरसात के सीजन में पहाड़ियां दरकने से आए दिन राजमार्ग बाधित होने लगा। यही स्थिति
चारधाम मार्ग की भी थी। सड़कों पर आए दिन मलबा व बड़े-बड़े बोल्डर गिरने, किनारों से ही सड़क ध्वस्त होने तथा अक्सर दुर्घटनाएं होने के चलते बीआरओ पर अंगुलियां उठने लगीं। लोगों के तीखे विरोध के चलते टनकपुर-पिथौरागढ़ हाईवे को बाद में राष्ट्रीय राजमार्ग के हवाले कर दिया गया।
टनकपुर से पिथौरागढ़ तक 1365 करोड़ रूपये की लागत से आॅल वेदर सड़क का निर्माण कार्य किया जाना है। इसके लिए गाजियाबाद, हरियाणा व महाराष्ट्र की कंपनियों को सड़क निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एनएच लोहाघाट डिवीजन के अधिशासी अभियंता एलडी मथेला का कहना है कि पूरी सड़क पेव्ड सोल्डर युक्त बनेगी। सड़क के किनारों पर पक्की पटरी बनाई जाएगी। हिल प्रोटक्शन के तहत वैरियर तथा दुर्घटनाएं रोकने के लिए दीवारें बनाई जाएंगी। बसों व ट्रकों के अलावा यात्रियों के लिए विश्राम स्थल बनेंगे, जिन जगहों पर ट्रक या अन्य वाहन अधिक रुकते हैं वहां पर उनकी सुविधा के लिए अतिरिक्त लेन बनाई जाएगी। तीखे व छोटे मोड़ बड़े बनाए जाएंगे। पूरी सड़क का ज्यामितीय तरीके से सुधार किया जाएगा। इसके लिए उक्रेन के इंजीनियरों की भी मदद ली जाएगी। चल्थी में 165 मीटर लंबा व 12 मीटर चैड़ा पुल बनेगा। यदि जरूरत हुई तो अन्य पुल भी बनाए जाएंगे। मार्ग पर तकरीबन तीन हजार नए कल्वर्ट भी बनेंगे। बकौल ईई मथेला सड़क चैड़ीकरण के लिए आधुनिक मशीनों का प्रयोग करते हुए विस्फोटक से बचा जाएगा। बेहद सख्त चट्टान को काटने में ही बारूद का प्रयोग किया जा सकता है। हाईवे पर बने नए डेंजर जोन चिन्हित कर सुरक्षात्मक उपाय किये जाएंगे। अन्य हिमालयी क्षेत्रों में पूर्व में जो आॅल वेदर रोड का निर्माण किया गया है, उसका लाभ वहां के लोगों को मिल रहा है। यदि आॅल वेदर रोड का निर्माण समय पर पूरा होता है तो निश्चित ही इसका लाभ पहाड़ की जनता को मिलेगा और यात्रियों का सफर सुगम होगा।

प्रधानमंत्री ने दिसंबर 2016 में देहरादून में किया आॅल वेदर रोड का शिलान्यास।

गढ़वाल में यह केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री व गंगोत्री को आपस में जोडे़गी, जबकि कुमाऊं में टनकपुर से पिथौरागढ़ तक 150 किमी. सड़क का निर्माण होगा। 
सड़क 12 मीटर चैड़ी बनेगी जबकि साढ़े दस फीट में डामरीकरण किया जाएगा।
आॅल वेदर रोड में सात नई सड़कें बनाई जाएंगी। 15 बड़े व 101 छोटे पुल, 5596 कल्वर्ट और 12 बाइपास बनेंगे। 
टनकपुर से पिथौरागढ़ तक 1365 करोड़ रूपये की लागत से आॅल वेदर सड़क का निर्माण कार्य किया जाना है। 
सड़क निर्माण में 33000 पेड़ों की बलि चढ़ेगी।

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